भारत सदियों से आस्था और आध्यात्मिकता की भूमि माना जाता है। यहाँ देवी माँ की शक्ति का विशेष महत्व है। कहा जाता है कि माता सती के शरीर के खंड जब धरती पर गिरे, तो 51 स्थानों पर शक्तिपीठों की स्थापना हुई। ये प्राचीन शक्तिपीठ आज भी हिंदू धर्म के सबसे पवित्र तीर्थ माने जाते हैं। हर शक्तिपीठ की अपनी कथा, परंपरा और देवी का एक अनूठा स्वरूप है।
1. कामाख्या देवी मंदिर (गुवाहाटी शक्तिपीठ)

कामाख्या मंदिर भारत के प्रमुख शक्तिपीठों में गिना जाता है। यहाँ माता सती का योनि अंग गिरा था। यह तंत्र साधना और शक्ति उपासना का मुख्य केंद्र है। कामाख्या मंदिर का सबसे बड़ा आकर्षण है अंबुबाची मेला। यह हर साल जून महीने में आयोजित होता है। इस दौरान यह माना जाता है कि माता रजस्वला होती हैं।
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तीन दिन तक मंदिर के पट बंद रहते हैं।
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चौथे दिन जब पट खुलते हैं, तो लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए उमड़ पड़ते हैं।
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इस मेले को असम का “कुंभ मेला” भी कहा जाता है।
2. वैष्णो देवी मंदिर (जम्मू-कश्मीर)

माता वैष्णो देवी मंदिर भारत के सबसे प्रसिद्ध और पवित्र हिन्दू तीर्थ स्थलों में से एक है। यह मंदिर जम्मू-कश्मीर के त्रिकुटा पर्वत पर स्थित है और समुद्र तल से लगभग 5,200 फीट की ऊँचाई पर बना हुआ है। यहाँ मां वैष्णो देवी के पवित्र गुफा में तीन प्राकृतिक पिंडियाँ (रूप) विराजमान हैं – महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती। इन्हें ही “माता रानी” के रूप में पूजा जाता है। हर साल लाखों भक्त माता के दर्शन करने के लिए यहाँ आते हैं। यात्रियों को कटरा से लगभग 13 किलोमीटर की पैदल यात्रा करनी होती है। पैदल यात्रा के साथ-साथ यहाँ घोड़े, पालकी और हाल के वर्षों में रोपवे और बैटरी कार की सुविधाएँ भी उपलब्ध हैं। भक्तों का मानना है कि माता वैष्णो देवी के दरबार में सच्चे मन से माँगी गई मुरादें जरूर पूरी होती हैं। नवरात्रों के समय यहाँ भव्य उत्सव और विशेष पूजा का आयोजन होता है, जब लाखों श्रद्धालु माता के जयकारों के साथ दर्शन के लिए पहुँचते हैं। माता वैष्णो देवी मंदिर न केवल एक धार्मिक स्थान है बल्कि आस्था, विश्वास और भक्ति का प्रतीक भी है। कहते हैं कि जो भी सच्चे मन से “जय माता दी” बोलकर यहाँ आता है, माँ उसकी झोली खुशियों और आशीर्वाद से भर देती हैं।
3. कालीघाट शक्तिपीठ (कोलकाता, पश्चिम बंगाल)

भारत के 51 शक्तिपीठों में से एक प्रमुख स्थान कालिघाट मंदिर है, जो पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में स्थित है। यह मंदिर मां काली को समर्पित है और श्रद्धालुओं के बीच इसका महत्व अत्यधिक है। माना जाता है कि यहां माता सती के दाहिने पैर की अंगुली (Right Toe) गिरी थी। इसी कारण यह स्थान शक्तिपीठों में शामिल हुआ। कालिघाट मंदिर गंगा नदी की एक सहायक धारा “आदि गंगा” के किनारे स्थित है। यह स्थान न केवल धार्मिक दृष्टि से, बल्कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण है। यहां मां काली की मूर्ति की विशेषता यह है कि देवी की जीभ बाहर निकली हुई है और उनका स्वरूप अत्यंत उग्र है। भक्त मानते हैं कि इस स्वरूप में मां अपने भक्तों के पापों का नाश करती हैं और उन्हें नई ऊर्जा प्रदान करती हैं।
हर साल लाखों श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए आते हैं। विशेष रूप से नवरात्रि, अमावस्या और काली पूजा के समय यहां भारी भीड़ होती है। कहा जाता है कि सच्चे मन से मां की आराधना करने से सभी दुख, कष्ट और बाधाएं दूर हो जाती हैं।
कालिघाट मंदिर न केवल एक धार्मिक स्थल है, बल्कि कोलकाता की पहचान और सांस्कृतिक धरोहर का भी प्रतीक है। यहां आने वाला हर भक्त मां काली के दर्शन कर अद्भुत शांति और आत्मिक बल प्राप्त करता है।
4. ज्वालामुखी शक्तिपीठ (कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश)

ज्वालादेवी मंदिर (ज्वालामुखी शक्तिपीठ) हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा ज़िले में स्थित भारत का एक अत्यंत प्राचीन और चमत्कारिक शक्तिपीठ है। यह मंदिर माता सती की जिह्वा (जीभ) के गिरने के कारण शक्तिपीठ माना जाता है। यहाँ देवी की प्रतिमा नहीं है, बल्कि प्राकृतिक रूप से निकलने वाली अग्नि की लपटों (ज्योति) को ही माता का स्वरूप माना जाता है। मंदिर में नौ ज्योतियाँ निरंतर जल रही हैं और इन्हें माँ के नौ रूपों से जोड़ा जाता है। आश्चर्य की बात यह है कि ये अग्नि लपटें न तेल से जलती हैं, न घी से—बल्कि ये सदियों से स्वयं जलती आ रही हैं। इन्हें दिव्य और चमत्कारिक शक्ति का प्रतीक माना जाता है।
5. त्रिपुर सुंदरी मंदिर (त्रिपुरा)

त्रिपुरसुंदरी की पूजा होती है। माना जाता है कि जब भगवान विष्णु ने माता सती के शरीर को खंड-खंड किया था, तब उनकी दाईं पैर की अंगुली इसी स्थान पर गिरी थी।
मंदिर की खासियत यह है कि यह कछुए के आकार पर बना हुआ है, जिसे ‘कूर्म पीठ’ कहा जाता है। वास्तुकला की दृष्टि से यह मंदिर बेहद आकर्षक है और यहाँ देवी माँ की मूर्ति काले कस्तूरी पत्थर से बनी हुई है। इस मूर्ति में माँ त्रिपुर सुंदरी को चतुर्भुजा रूप में दर्शाया गया है, जो शांति और शक्ति का प्रतीक है।
हर साल यहाँ दीपावली मेला बड़े धूमधाम से आयोजित किया जाता है, जिसमें हजारों भक्त देश और विदेश से आकर देवी माँ के दर्शन करते हैं। त्रिपुर सुंदरी मंदिर को त्रिपुरा का सबसे पवित्र और महत्वपूर्ण मंदिर माना जाता है और यहाँ आकर श्रद्धालु माँ से सुख-समृद्धि और शांति की कामना करते हैं।
6. शारदा देवी मंदिर (मैहर, मध्य प्रदेश)

माँ शारदा मंदिर, मध्य प्रदेश के सतना जिले के मैहर में स्थित एक प्रमुख हिंदू तीर्थ स्थल है। यह मंदिर त्रिकूट पर्वत की चोटी पर लगभग 600 फीट की ऊँचाई पर स्थित है और देवी शारदा, जिन्हें देवी सरस्वती का रूप माना जाता है, को समर्पित है। मंदिर का धार्मिक महत्व अत्यंत प्राचीन है और इसे 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। कथाओं के अनुसार, जब भगवान शिव माता सती का शरीर लेकर भ्रमण कर रहे थे, तो उनकी हार इस स्थान पर गिरी थी, जिससे यह स्थान पवित्र माना गया। प्रसिद्ध योद्धा अल्हा और उदल ने इस मंदिर की खोज की थी और अल्हा ने यहाँ 12 वर्षों तक तपस्या कर देवी शारदा से अमरता का वरदान प्राप्त किया था। मंदिर की वास्तुकला राजपूत और मुग़ल शैली का सुंदर मिश्रण है, और यहाँ एक भव्य गर्भगृह, संगमरमर का चबूतरा और अल्हा तालाब भी स्थित हैं। मंदिर तक पहुँचने के लिए श्रद्धालु 1,063 सीढ़ियाँ चढ़ सकते हैं या रोपवे सेवा का उपयोग कर सकते हैं। निकटतम रेलवे स्टेशन मैहर है, जो लगभग 7 किलोमीटर दूर है। नवरात्रि के दौरान मंदिर लाखों श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है, और प्रशासन ने इस समय मांसाहारी खाद्य पदार्थों पर प्रतिबंध, सुरक्षा व्यवस्था और अतिरिक्त रेलवे सुविधाएँ सुनिश्चित की हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए शीघ्र दर्शन योजना भी चलायी जाती है, जिसमें एक निश्चित शुल्क और दान देकर शीघ्र दर्शन किया जा सकता है। इस प्रकार माँ शारदा मंदिर धार्मिक आस्था, ऐतिहासिक महत्व और भव्य वास्तुकला का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है।
7. अम्बाजी शक्तिपीठ (गुजरात)

8. मीनाक्षी अम्मन मंदिर (मदुरै, तमिलनाडु)

मंदिर, तमिलनाडु के प्राचीन शहर मदुरै में स्थित, भारत के सबसे प्रमुख और भव्य हिन्दू मंदिरों में से एक है। यह मंदिर स्थापत्य कला और भव्यता के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ देवी की कण्ठमाला गिरी थी। यह मंदिर भगवान शिव (सुंदरनाथ) और देवी मीनाक्षी को समर्पित है और पंड्या वंश के समय से इसकी ऐतिहासिक महत्ता रही है। मंदिर अपनी विशालता, शानदार वास्तुकला और जटिल नक्काशी के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। यहाँ कुल 14 गोपुरम (गेटवे टावर) हैं, जिनमें मुख्य पूर्वी गोपुरम सबसे ऊँचा और भव्य है, जो दूर से ही देखने वालों को मंत्रमुग्ध कर देता है। मंदिर के हॉल और मंडप, जैसे अन्नकोष्ठा और अदियामंडपम, प्राचीन तमिल वास्तुकला की उत्कृष्ट कला का अद्भुत उदाहरण हैं। मीनाक्षी मंदिर का सबसे महत्वपूर्ण उत्सव मीनाक्षी थिरुकल्यम है, जिसमें देवी मीनाक्षी और भगवान सुंदरनाथ के विवाह समारोह का भव्य आयोजन होता है, और लाखों श्रद्धालु एवं पर्यटक इसे देखने और भाग लेने आते हैं। मंदिर परिसर में जलाशय, छोटे मंदिर और विविध मंडप भी हैं, जो इसे धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण बनाते हैं। अगर आप भारतीय मंदिरों की भव्यता और प्राचीनतम वास्तुकला का अनुभव करना चाहते हैं, तो मीनाक्षी
9. हिंगलाज माता मंदिर (बलूचिस्तान, पाकिस्तान)

यह शक्तिपीठ भारत के बाहर है। यहाँ देवी का सिर गिरा था। माँ हिंगलाज मंदिर हिंदू धर्म के प्रमुख शक्तिपीठों में से एक है और यह पाकिस्तान के बलोचिस्तान राज्य के रेगिस्तानी इलाके में स्थित है। इसे हिंगलाज माता का स्थान भी कहा जाता है और माना जाता है कि यहाँ माता सती का एक अंग गिरा था, इसलिए यह स्थान अत्यंत पवित्र माना जाता है। मंदिर रेगिस्तान के बीचोबीच स्थित होने के कारण पहुँचने के लिए श्रद्धालुओं को लंबी और कठिन यात्रा करनी पड़ती है, जिसमें अक्सर ऊँट की सवारी या पैदल मार्ग से गुजरना शामिल होता है। यहाँ हर साल भाद्रपद माह और नवरात्रि के समय हजारों श्रद्धालु आते हैं, अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति और संकट से मुक्ति के लिए माता हिंगलाज की पूजा करते हैं। हिंगलाज माता को विशेष रूप से संकट मोचक और संकट निवारक देवी के रूप में पूजा जाता है। यह मंदिर न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि मानव आस्था और भक्ति का जीवंत उदाहरण भी प्रस्तुत करता है, जहाँ दूर-दराज के लोग कठिनाइयों का सामना करते हुए यहाँ पहुँचकर अपने विश्वास और श्रद्धा का परिचय देते हैं।
10. चामुंडा देवी मंदिर (कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश)

यह मंदिर माँ के बाल गिरने की मान्यता के लिए प्रसिद्ध है।
भारत के ये प्राचीन शक्तिपीठ केवल धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, इतिहास और भक्ति के आधार स्तंभ हैं। हर प्रसिद्ध माता मंदिर माँ शक्ति के एक अद्भुत स्वरूप को दर्शाता है। कहा जाता है कि इन मंदिरों के दर्शन मात्र से जीवन में ऊर्जा और शांति प्राप्त होती है।
आज भी करोड़ों श्रद्धालु कठिन यात्राएँ कर इन शक्तिपीठों तक पहुँचते हैं और माँ शक्ति की कृपा से अपने जीवन को धन्य मानते हैं। यही कारण है कि भारत के शक्तिपीठ सदियों से आस्था और शक्ति का अद्वितीय संगम बने हुए हैं।